किसान बैठे आस लगाए कि नहर में आए पानी और हम करें किसानी
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कैफ़ी सुल्तान की रिपोर्ट/आजमगढ़। जीवन में पानी की अहम भूमिका है। वहीं गर्मी में पानी के स्रोतों की उपयोगिता और बढ़ जाती है। तपती धूप में समृद्ध ताल-तलैया,नहरें जीवन दान का काम करती हैं। खेती-किसानी, पेड़-पौधे, जीव-जंतु की निर्भरता इसी पर होती है। वहीं भीषण गर्मी में तहसील क्षेत्र की सूखी शारदा सहायक नहर विभागीय लापरवाही को खुली किताब की तरह उजागर कर रही है। लापरवाही से किसान मुश्किल में हैं।
शारदा सहायक नहर में पानी बंद कर दिए जाने से किसानों के समक्ष पशुओं के हरे चारे के उत्पादन, सब्जी की खेती व फसलों की सिंचाई करने में परेशानी बढ़ गई है। वहीं बेसहारा पशुओं को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। मुख्य नहर से लगभग सैकड़ों गांवों के किसान आधारित हैं। खेती-किसानी के सिचाई का मुख्य साधन नहर ही है। सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था ट्यूबवेल है लेकिन ऐसे में जिन किसानों के पास ट्यूबवेल नहीं है अथवा सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है उनके लिए काफी समस्या हो रही है। इस समय धान की बुवाई जोरों पर है लोग धान के बीज लगा रहे हैं। धान के बीज को तैयार करने और उनकी रोपाई करने के साथ-साथ फसल के तैयार होने तक सिंचाई की जरूरत होती है। ऐसे में जिन किसानों के पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है और नहरों पर ही आश्रित है, उनके लिए यह एक दुर्लभ घड़ी है और वह नहरों की तरफ आस लगाए एक टक नजर लगाए बैठे हुए हैं कि कब पानी आए और कब सिंचाई हो। किसान फूलचंद सरोज, अशोक सरोज, रामजतन सरोज, मिथिलेश प्रजापति कहते हैं कि बीते दिनों में नहर साफ-सफाई के नाम पर बंद होती थी, इस बार अकारण ही पानी बंद कर दिया गया है। पानी के अभाव में इन दिनों पशुओं के लिए हरे चारे बोने की परेशानी बढ़ गई है। वहीं बेसहारा पशु पानी की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
ऐसी परिस्थिति में क्षेत्र के नहरों ने भी जवाब दे दिया है। नहरों में धूल उड़ रही है। इस समय फसलों, और छुट्टा पशुओं इत्यादि के लिए पानी की आवश्यकता होती है कितु यहां की नहरें सूखी पडी हैं।
शारदा सहायक नहर से बारौना, बड़गहन, सहानुडीह, बर्रा, सतैनी, बैरी, कोदहरा, चोर्रा, बरदह, बकेश, असवानिया, देवगांव, अहिरौली, छत्तरपुर समेत सैकड़ों गांव आश्रित है। नहर में पानी ना होने से क्षेत्रीय जल स्तर पर प्रभाव पड़ता है। क्षेत्रीय गांवों में जलाशय लगभग सूख रहे हैं।
