भाजपा की हार को नहीं पचा पा रही जनता:आजमगढ़ के नुक्कड़, चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म, भितरघात बनी कारण

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आजमगढ़ में निकाय चुनाव में भाजपा की हार को नहीं पचा पा रही जनता, मतगणना स्थल से अकेले ही बाहर निकलते भाजपा के प्रत्याशी अभिषेक जायसवाल दीनू।
जियाउल हक जी की रिपोर्ट
(I.C.B चीफ)
दूरदर्शन न्यूज़ 24/7

(विस्तार)
आजमगढ़। आजमगढ़ नगर पालिका चुनाव में भाजपा की हार को नगर की जनता नहीं पचा पा रही है। निकाय चुनाव में सपा के मुस्लिम प्रत्याशी की विजय के बाद नुक्कड़ चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस चुनाव परिणााम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि जनता को अपनी गलती का आभास भी होता दिख रहा है। निकाय चुनाव के लिए नगर क्षेत्र से 14 प्रत्याशी मैदान में थे। ऐसे में समाजवादी पार्टी की तरफ से एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी था। ऐसे में मतों में हुई सेंधमारी का खामियाजा भाजपा के प्रत्याशी को भुगतना पड़ा और चुनाव हार गया।
भितरघात बनी कारण
नगर के निकाय चुनाव के लिए नगर क्षेत्र से बड़ी संख्या में दावेदार थे। पर पार्टी नेतृत्व द्वारा टिकट न दिए जाने से नाराज ऐसे पदाधिकारियों ने अंदर ही अंदर प्रत्याशी का विरोध करना शुरू किया। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए भाजपा प्रत्याशी अभिषेक जायसवाल दीनू का कहना है कि नगर क्षेत्र में 10 हजार मेरा वोट है। मैं चाहे जिस पद के लिए लड़ जाऊं। भाजपा प्रत्याशी का कहना है कि जो सहयोग हमें जिले के नेताओं से मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। इसके साथ ही जो 1700 वोट इन्वैलिड बताया गया उसमें से 1200 से अधिक वोट भाजपा का था। भाजपा के पदाधिकारियों का यदि सहयोग मिल जाता तो शायद हार न होती। भाजपा पदाधिकारियों का यथोचित सहयोग न मिलने से भाजपा प्रत्याशी काफी दुखी नजर आ रहे हैं।
पूरे पूर्वांचल को साधने की कोशिश
आजमगढ़ जिले से पूरे पूर्वांचल को साधने के लिए जिले के एक होटल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता, जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी, देवरिया के सांसद रमापति राम त्रिपाठी सहित कई दिग्गजों के साथ ही गोरखपुर क्षेत्र के 12 जिलों के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निकाय चुनाव की मजबूती पर जोर दिया गया था। इसके साथ ही आजमगढ़ जिले में आंतरिक कलह से जूझ रही भाजपा के पदाधिकारियों को एक साथ आकर भाजपा प्रत्याशी की मदद करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए निर्देश के बाद भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर तो आए। पर वोटों को कन्वर्ट कराने में नाकाम रहे। जिले में भाजपा के प्रत्याशियों की जीत को सुनिश्चित कराने के लिए क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय तक को सड़कों पर उतरकर डोर टू डोर मतदान के लिए लोगों से वोट भी मांगने पड़े, बावजूद इसके जिले की 16 सीटों में से महाराजगंज नगर पंचायत की सीट ही भाजपा के खाते में आ पाई। ऐसे में निश्चित रूप से लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत से उत्साहित कार्यकर्ताओं में निकाय चुनाव में हार से निराशा हुई है। स्थिति यह हुई की नगर क्षेत्र में ही भाजपा प्रत्याशी को तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।