लखनऊ: कमिश्नर ने मास्टर-प्लान बनाने के निर्देश दिए, रिहायशी क्षेत्र के श्मशान घाट शहर से बाहर होंगे, व मोतीझील का स्वरूप वापस लाने की तैयारी।

Views
समीर खान की रिपोर्ट।
दूरदर्शन न्यूज़ 24/7 ब्यूरो चीफ लखनऊ।

(विस्तार)

लखनऊ: कमिश्नर ने रिहायशी क्षेत्र के श्मशान घाटों को शहर से बाहर करने के लिए निर्देश दिया है। बैठक में ऐसे शव दाह स्थलों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके लिए संबंधित विभाग नगर निगम के अधिकारियों को इकाना स्टेडियम के बगल में 30 एकड़ जमीन का प्रयोग किया जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण को इसके लिए मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए।
साथ ही लखनऊ में मोतीझील का स्वरूप वापस की बात की।
राजधानी की कुछ प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा मंगलवार को कमिश्नर रंजन कुमार और सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी ने की।मंडलायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में मोती झील, जमुना झील और टिकैतराय तालाब का मूल स्वरूप वापस लाने के लिए हो रहे प्रयासों पर चर्चा हुई। कभी राजधानी की पहचान रहीं ये झीलें और तालाब संवारे जाएंगे। बैठक में टिकैतराय तालाब के बारे में संबंधित अधिकारियों ने बताया कि इसके सौन्दर्यीकरण के लिए टेंडर कराया जा चुका है। जल्द ही कार्य शुरू होने वाला है। इसके अलावा मोती झील और जमुना झील की सफाई को लेकर कमिश्नर ने सख्त निर्देश दिया। इसके अलावा बैठक में लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भी विचार विमर्श किया गया। सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र के विकास के संबंध में लीडा के साथ चर्चा की गई। कभी एक थी मोती झील और जमुना। ऐशबाग में कब्रिस्तान के बगल में स्थित जमुना झील सैकड़ों वर्ष पुरानी है। इसकी परिधि 1.8 किलोमीटर है। पूर्व में जमुनिया कही जाने वाली इस झील का नाम बाद में जमुना हो गया। यह मोती झील का ही हिस्सा थी जो बाद में अलग हो गई। वर्ष 2006 में इसके सौन्दर्यीकरण के लिए प्रयास शुरू हुए। इस परियोजना में 10 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि खर्च हो गई लेकिन काम बीच में ही रुक गया। वर्ष 2020 के दिसम्बर में स्वंय सेवी संगठनों ने इसका सौन्दर्य वापस लाने के प्रयास शुरू किए। पहले ऐशबाग जलकल के बैक वाश का पानी भी झील में जाता था। झील को साफ करने के लिए प्रयास शुरू हुए तो तय हुआ कि जल निगम इस पानी को साफ करने के बाद झील में सप्लाई करेगा। इसके लिए प्लांट भी लग गया था लेकिन यह भी काम बीच में ही रुक गया।