प्रयागराज में पुरुष आयोग की मांग को लेकर इलाहाबाद जन कल्याण समिति ने राष्ट्रपति को लहू से लिखा पत्र,पुरुष मंत्रालय का हो गठन।

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कैफ़ी सुल्तान की खबर
दूरदर्शन न्यूज 24/7
प्रधान संपादक

प्रयागराज: भारत में पुरुषों के लिए एक समर्पित आयोग और मंत्रालय बनाने की मांग उठ रही है, और इस दिशा में कानूनी और सामाजिक स्तर पर प्रयास जारी हैं। वहीं प्रयागराज में निशुल्क समाज सेवा करने वाली एकमात्र संस्था इलाहाबाद जनकल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद हन्जला 12 वर्षों से लगातार पुरुष आयोग की मांग कर रहे हैं। इन्होंने पुरुष मंत्रालय गठन को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री गृहमंत्री सभी को कई वर्षों से पत्र लिख रहे हैं इस मुद्दे पर सुनवाई न होने पर आज इलाहाबाद जनकल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद हंजला उर्फ सद्दाम हुसैन राष्ट्रपति को अपने खून से पत्र लिखा।
लहू से लिखा पत्र अध्यक्ष हन्जला ने पुरुषों के अधिकारों की लगातार अनदेखी के विरोध में एक भावनात्मक और साहसिक कदम उठाते हुए अपने ही लहू से पत्र लिखकर केंद्र सरकार से पुरुष आयोग के गठन की मांग की है। पत्र में कहा कि वे पिछले 12 वर्षों से लगातार पुरुष आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार और व्यवस्था की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरुषों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज पुरुष कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर है, वर्षों तक मुकदमे चलते रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद उसे समय पर इंसाफ नहीं मिल पाता। झूठे मुकदमों, लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और सामाजिक दबाव के कारण पुरुष मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से टूटता जा रहा है।
अध्यक्ष हन्जला ने यह भी कहा कि जब महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग हो सकता है, तो पुरुषों के लिए अलग आयोग क्यों नहीं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुरुषों के अधिकारों की रक्षा हेतु एक स्वतंत्र पुरुष आयोग का गठन किया जाए, जिससे पीड़ित पुरुषों को न्याय मिल सके और न्याय व्यवस्था में संतुलन स्थापित हो।
इलाहाबाद जनकल्याण समिति के सचिव परशुराम ने कहा कि हम लोगों ने मजबूरी में लहू से पत्र लिखा है, और हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमारी मांग पूरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूरे भारत में पुरुष आयोग की अलख जली है, तो उसकी शुरुआत प्रयागराज की इलाहाबाद जनकल्याण समिति द्वारा की गई है।वहीं समिति के कोषाध्यक्ष मोहम्मद नासिर ने कहा कि जब तक पुरुष आयोग का गठन नहीं हो जाता, तब तक हम लोग चैन से नहीं बैठेंगे और यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
लहू से लिखा गया यह पत्र शासन-प्रशासन और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी और संवेदनशील अपील के रूप में देखा जा रहा है।